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उपदेश


January 11th, 2026

                                                                  ✍️ ईशान कोच

आस्बे नौताबिन अटल छे मृत्यु बद्ला नि जाबे
सोना चाँदी घर अकुन सम्पत्ति कामे नि लाग्बे
जाना छे एकदिन छरिए जीन्दगीसे दुरे ते
जाते जाते करि कुछु कि पछ्ताइ ना रे घुरीए ॥१

विश्वासे पात्र छल करिजाचे विनाशी अधर्मी
ना जाने कार्ह घर उजराए कि पाछे कुकर्मी ?
बाहारे सुन्दर सरिफ संसार भित्रे दरिद्र
अत्याचारी छल नियति अन्धार मती विचित्र ॥२

वाना आरो समय रुकिबे ना घुरे कार्हबादे
जाबो जे एकदिन मरिए तोर जाबे कि साथे ?
उच्चा राखी शिर सफल नामे कमाए चले जा
सादासा जीवन सरल भावे बहाए चले जा ॥३

सत्कर्मे डाकि हृदय दुवा दान आत्मार शुद्धि
भोके जे मेटि गरिब दुखीरे हबे मान वृद्धि
धर्मे कर्मे थिर बनि अहंकार त्यागे महान
शिक्षा दीक्षा गुण असल संस्कार छे मूल्यवान ॥४
“शेष”

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