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रूपवती


January 11th, 2026

                                                    ✍️ ईशान कोच

रूपवती जाहाँइ, दुरदुर भागे

धर्तीर उड, चानसे आगे

बखाने ओर, कर्बाउ कठिन

फूल भि जाए, फूले जे बागे ॥

 

पेटानीर पर होक्, या ते सारी

सुन्दर- कि तितली, ना जलपरी?

मुस्कान मिठा, उ रसिया बलि

माथारौ गदगद, तोर चुले भारी ॥

 

नरम गाल, कलकलिया जोवन

एठनमठन चाल, सोह्रोरे गठन

लागाए निकुल, नजरेर टिक्का

कर, ऐ सुन्दरी, आपुनार जतन ॥

 

गर गर कम्मर, उपर काल तिल

जाए बठिगेल, अइठि मोर दिल

गरगराए बर्षे मेघ, नाचे मजुस

देखिया गाए, मिठा गीत कुह्किल ॥

 

गमगम रे दाहा, कोइ फूल हइ ना?

साजा रे देखुँ, तोक महरे कइना

भाचे अनङ रुप, कि त्यागु हर सुख

लिबो ते लिएराख्, आल्हाएसे बैना ॥

 

चकचक काजली, मृग-नैनार धार

चिरेचे इखान सिना, आरसे पार

माङुना जल, हउ घायल मुइ

देखिया रे तोर, उ मूर्त शृङ्गार ॥

***शेष***

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