शिर्षक ला

Responsive image

गान्ढागोल


January 11th, 2026

✍️ ईशान कोच

चान्दरुपी तुई… रुपेसे साजिएने-
पागेला करिचिस्, मोर मन…
सुरुजमुखी तुई… मुखेसे हासिएने-
उजाला भरिचिस्, इड जीवन।

जगमगाई फुलिचिस्,
कोइ फूलसा महकिचिस्- हरअंग गम’गम
रङेचङे साजिचिस्,
कोइ तारोसा चम्किचिस्- हरअंग चम’चम
काह छे नि तोर लाखा,
इन्द्रधनुषे भि, छे रे फिका,
जीन्दगीते भरिचिस्- तुई.प्रेम रग’रग।

जादु छे रे रुपत,
घुरेचे मोर मन- तोर आसपास
बिसाचे रे बुकत,
फुलेचे तोर बिन- मोर आप सांस
एकपल दुर. सहाव नि जाए,
बिन देखि. रहाव नि जाए,
जीन्दगी रे तोर बिन- मोक निबर्दास।

रातरातते,
सपने खेलिए जागेचु- मायार खेल
दिनदिनते,
नैना खुलिए निदाचु- मोके कि होल
अन्धकारसे घिरिछु,
मझधारते परिछु,
जीन्दगी मोर हइगैचे- गान्ढागोल॥

*** ओर ***

Bandagi Khabar -© 2026