शिर्षक ला

Responsive image

छाबिचु


January 11th, 2026

            ✍️ ईशान कोच

जब जब बुक धर्किचे छाबिचु

जब जब दुख बर्षिचे छाबिचु

दिल पलपल डाकिछे रे त’के

मन बसत निछे हले जे त’रे ॥

 

मनड सुटकरे क’भा चाहिचे

कि कि सकिमु त’के दिबा चाहिचे

रहम जबतके सङे जीम ले

हर सुखदुखला सङे पीम ले ॥

 

खलखल जल जे लदीरे बहे

शितल पवन तोर बाहे झुमे

पिर हरु बनिजाउ साया सदा

कभि भि कम निहोक माया सदा ॥

 

जब भि मन त’के सचे अन्छाए

चकमक तब चान भी खेलाए

दनुझन दुनियाँक भिन्ने करे

छट घर छट एकटी होक रे ॥

 

तुइ-मुइ दुर कोइठी जाम ले

सङ-सङ नुन भात भी खाम ले

नि छु धनि गरिबीर डाँरे द’बा

जनमन करिए कि पाबो र’भा ?

 

कि कि कहिमु त’रे बिना जीन्दगी

कुछु कमि कुछु छे सुना जीन्दगी

स्मरण जब भि यादते आसिचे

चनचल रुप मेघते हाँसिचे ॥

“शेष”

Bandagi Khabar -© 2026