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काँह अन्छाइ दे


January 11th, 2026

                                                                              ✍️ ईशान कोच

साहारा मन छाबिले मिलिल ना रे काँह अन्छाइ दे

हाँसीर्पल खुसी दिए दुखत लोई जाँह मूछाइ दे।

दूबारा मन जागिले करु कि माया मर्ह भागे कि छे?

मेघेर्सङ उराउ काँह महके भी पंख लागाइ दे ॥१

 

फूलेर्मान सुगन्ध दोक् कि हर आसा फेर जागे उठे

तारोर्मान जलोक जीवन सदा चक्मक्किए रे कटे।

खेते हाल चलाइने जब घुरुँ ते काँह सिन्वाइ दे

आप्ना कोमल हातसे मिठ-तिता रे जाँह खिल्वाइ दे ॥२

 

सादासा मन होक गत्तर सभाङे धक्धकाए बुके

हाँसीसे रुप निख्रिए बलिर स्वरे सांस जाए रुके।

मायारे एकटी सजा घर जहाँते फूल छिर्याइ दे

मुस्काने गुनजोक द्वार खुसियाली जाइ ढेर्याइ दे ॥३

 

जाँहारे रङ चान्डके शितल नैनाते उजाला दिचे

जाँहे सूरुजके धिमा करि पथाग्नी रे जलाया दिचे।

जीन्दोगी सुरु जे हबे महक आप्ना काँह बेनाइ दे

साथे होक सदा दुखी हउ हसाए जाँह मानाइ दे ॥४

 

आवाजे सुनिए पखी कमल घाटे घाटते हेलिबे

साजा जे देखिए इन्द्रधनुष आप्नाते रङे खेलिबे

आसाते सपुने उराल दिल झिट्काए नि नेम्हाइ दे

माया जालत फाँसिए गिछु समुन्द्रे रे नि फेकाइ दे ॥५

***ओर होल***

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